दिल्ली में CJP संस्थापक अभिजीत दिपके का बयान, बोले- न डरेंगे, न पीछे हटेंगे
दिल्ली में CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने हाल की गिरफ्तारियों और हिरासत की कार्रवाइयों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई की उम्मीद जताते हुए कहा कि संगठन आगे की रणनीति तैयार करेगा और कानूनी विकल्पों पर विचार करेगा।

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2026: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने दिल्ली में हाल के दिनों में हुई गिरफ्तारियों और हिरासत की कार्रवाइयों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कार्रवाइयों के माध्यम से संगठन के सदस्यों को डराने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि संगठन किसी दबाव में पीछे नहीं हटेगा और अपनी आगे की रणनीति पर सामूहिक रूप से निर्णय लेगा।
दिपके ने अपने बयान में कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका के वापस आने के बाद सभी सदस्य एकत्र होंगे और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा करेंगे। उन्होंने दोनों की जल्द रिहाई की उम्मीद भी जताई।
गिरफ्तारियों और हिरासत को लेकर उठाए सवाल
अभिजीत दिपके ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में सामने आए घटनाक्रम को देखते हुए उन्हें लगता है कि संगठन के सदस्यों को डराने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने गिरफ्तारियों और हिरासत की कार्रवाइयों को गैरकानूनी बताते हुए आरोप लगाया कि इनका उद्देश्य संगठन की गतिविधियों को प्रभावित करना है।
दिपके ने कहा कि संगठन इन परिस्थितियों से भयभीत नहीं होगा और अपनी गतिविधियां जारी रखेगा। उन्होंने इसे लंबी लड़ाई बताते हुए कहा कि सभी सदस्य इसके लिए तैयार हैं।
हालांकि, हिरासत की कार्रवाई को गैरकानूनी बताना दिपके का आरोप है। संबंधित पुलिस कार्रवाई की वैधता का निर्धारण उपलब्ध कानूनी रिकॉर्ड और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।
सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई का इंतजार
दिपके ने बताया कि संगठन सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई का इंतजार कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों को रविवार को रिहा कर दिया जाएगा।
उनके अनुसार, दोनों सदस्यों की वापसी के बाद संगठन की बैठक होगी, जिसमें हाल के घटनाक्रम की समीक्षा की जाएगी और भविष्य की रणनीति तैयार की जाएगी।
हालांकि, इस ताजा बयान के समय दोनों की रिहाई की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं थी।
अक्टूबर में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से बढ़ा विवाद
इस मामले की पृष्ठभूमि अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से जुड़ी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 10 अक्टूबर को अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे।
तीनों मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले थे। यह प्रदर्शन मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मुद्दे से संबंधित था।
दिल्ली पुलिस ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद तीनों को हिरासत में लिया था। पुलिस के अनुसार, प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं दी गई थी।
11 अक्टूबर को तीनों को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। इसके बाद शांति बनाए रखने से संबंधित शर्तों और 50,000 रुपये के मुचलके पर उन्हें रिहा किया गया था।
16 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन के बाद दोबारा कार्रवाई
16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस में प्रस्तावित 'लहरा दो तिरंगा' विरोध मार्च को लेकर भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद सामने आया।
इस दौरान दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके को हिरासत में लिया। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को भी पुलिस ने हिरासत में लिया था।
पुलिस के अनुसार, सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका के आधार पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत दिपके के खिलाफ निवारक कार्रवाई की गई।
वहीं, प्रदर्शन से जुड़े संगठनों ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई और हिरासत की परिस्थितियों को लेकर सवाल उठाए।
17 अक्टूबर को दिपके को शांति बनाए रखने के लिए बांड भरने के बाद सशर्त रिहा कर दिया गया था।
कानूनी मामलों पर चर्चा की तैयारी
अभिजीत दिपके ने अपने ताजा बयान में कहा कि वह कुछ कानूनी मामलों पर चर्चा करने के लिए वृंदा मैडम से मिलने जा रहे हैं। उनके बयान में संबंधित व्यक्ति की पूरी पहचान स्पष्ट नहीं की गई।
इससे पहले 17 अक्टूबर को CJP के प्रतिनिधियों ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल से भी परामर्श किया था।
संगठन ने कहा था कि यदि सौरव दास और आशुतोष रांका को रिहा नहीं किया गया, तो वह संबंधित हिरासत के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के विकल्पों पर विचार करेगा।
हालांकि, किसी नई याचिका या प्रस्तावित कानूनी कार्रवाई की अंतिम स्थिति आधिकारिक दस्तावेजों से ही स्पष्ट होगी।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का कानूनी पहलू
भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(b) के अंतर्गत नागरिकों को शांतिपूर्ण और बिना हथियारों के एकत्र होने का अधिकार प्राप्त है। हालांकि, सार्वजनिक व्यवस्था सहित संवैधानिक आधारों पर इस अधिकार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
दूसरी ओर, पुलिस को कानून के निर्धारित प्रावधानों के अंतर्गत सार्वजनिक शांति बनाए रखने और संभावित अपराधों को रोकने के लिए निवारक कार्रवाई करने का अधिकार भी प्राप्त है।
ऐसी कार्रवाई की वैधता संबंधित परिस्थितियों, कानूनी प्रावधानों और न्यायिक परीक्षण पर निर्भर करती है।
इस मामले में प्रदर्शन से जुड़े संगठनों और पुलिस के अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। संगठन ने हिरासत को लेकर आपत्ति जताई है, जबकि पुलिस ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने से संबंधित कानूनी प्रावधानों का उल्लेख किया है।
आगे की रणनीति पर संगठन करेगा फैसला
अभिजीत दिपके के अनुसार, सौरव दास और आशुतोष रांका की वापसी के बाद संगठन के सदस्य बैठक करेंगे और आगे की कार्ययोजना निर्धारित करेंगे।
इस बैठक में हाल की पुलिस कार्रवाइयों, कानूनी विकल्पों और संगठन की आगामी गतिविधियों पर चर्चा होने की संभावना है।
फिलहाल, दोनों सदस्यों की रिहाई की स्थिति, संभावित कानूनी कार्रवाई और संगठन की अगली बैठक इस मामले के महत्वपूर्ण पहलू बने हुए हैं।
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मूल लेख: https://www.gt24x7bharat.in/rajniti/dilli-men-cjp-sansthaapak-abhijit-dipake-kaa-bayaan-bole-n-darenge-n-pichhe-hatenge
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